गृह संपत्ति से आय पर टैक्स की गणना: धारा 24, NAV और कटौतियां
आपने संपत्ति किराए पर दी, किराया आना शुरू हुआ — और फिर आयकर विवरणी भरने का वक्त आया। अब क्या करें? पूरे किराए पर टैक्स नहीं लगता। भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 में "गृह संपत्ति से आय" (Income from House Property) की गणना का एक व्यवस्थित ढांचा है जो कई वैध कटौतियां देता है — अगर आप इन्हें सही तरीके से दावा करें।
धारा 22: किराया किस पर लगता है
आयकर अधिनियम की धारा 22 के तहत किसी भी संपत्ति (भवन या भूखंड) से प्राप्त किराया "गृह संपत्ति से आय" की श्रेणी में आता है। यह आय आपकी कुल आय में जुड़ती है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगता है।
लेकिन टैक्स पूरे किराए पर नहीं, बल्कि शुद्ध वार्षिक मूल्य (Net Annual Value — NAV) पर लगता है।
NAV की गणना: कदम दर कदम
कदम 1 — सकल वार्षिक मूल्य (Gross Annual Value — GAV): किराए पर दी गई संपत्ति का GAV निम्न में से जो अधिक हो वह होता है:
- वास्तविक प्राप्त वार्षिक किराया, या
- नगर निगम द्वारा निर्धारित उचित किराया मूल्य
कदम 2 — नगर निगम कर घटाएं: GAV में से उस वित्तीय वर्ष में मकान मालिक द्वारा वास्तव में भुगतान किया गया नगर निगम संपत्ति कर घटाया जाता है। यदि किरायेदार ने कर भुगतान किया है, तो यह कटौती नहीं मिलती।
NAV = GAV − संपत्ति कर
कदम 3 — धारा 24(a) की मानक कटौती: NAV पर सीधे 30% की फ्लैट कटौती मिलती है — चाहे आपने वास्तविक मरम्मत या रखरखाव पर एक रुपया खर्च किया हो या नहीं। यह कटौती बिना किसी रसीद या प्रमाण के मिलती है।
कदम 4 — धारा 24(b): होम लोन ब्याज: यदि संपत्ति किराए पर दी गई है (Let-Out Property), तो गृह ऋण पर चुकाए गए पूरे ब्याज की कटौती मिलती है — ₹2 लाख की कोई सीमा नहीं। स्व-अधिकृत (Self-Occupied) संपत्ति पर यह सीमा ₹2 लाख है, लेकिन किराए पर दी गई संपत्ति पर यह सीमा लागू नहीं होती।
कर योग्य आय = NAV − धारा 24(a) कटौती − धारा 24(b) ब्याज
व्यावहारिक उदाहरण: ₹30,000 मासिक किराए पर टैक्स कितना
एक निवेशक की संपत्ति से वार्षिक किराया ₹3,60,000 (₹30,000 प्रति माह):
| मद | राशि |
|---|---|
| वार्षिक किराया (GAV) | ₹3,60,000 |
| नगर निगम संपत्ति कर | ₹20,000 |
| NAV (GAV − संपत्ति कर) | ₹3,40,000 |
| धारा 24(a) कटौती (30% of NAV) | ₹1,02,000 |
| होम लोन ब्याज (धारा 24(b)) | ₹1,50,000 |
| कर योग्य आय | ₹88,000 |
यदि निवेशक 30% टैक्स ब्रैकेट में है: ₹88,000 × 30% = ₹26,400 टैक्स
यानी ₹3,60,000 की किराया आय पर केवल ₹26,400 टैक्स — प्रभावी दर मात्र 7.3%। होम लोन ब्याज की पूरी कटौती इसे इतना कम कर देती है।
यदि होम लोन नहीं है तो: ₹3,40,000 − ₹1,02,000 = ₹2,38,000 कर योग्य → 30% स्लैब पर ₹71,400 टैक्स।
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TDS नियम: किरायेदार की जिम्मेदारी
यदि मासिक किराया ₹50,000 से अधिक है:
- धारा 194-IB के तहत किरायेदार को हर महीने किराए से 5% TDS काटना और सरकारी खाते में जमा करना अनिवार्य है
- किरायेदार TAN के बिना केवल पैन से फॉर्म 26QC भरकर TDS जमा कर सकता है
- TDS न काटने पर किरायेदार पर जुर्माना और ब्याज लग सकता है
₹50,000 से कम किराए पर TDS नहीं काटना होता — लेकिन मकान मालिक को किराया आय स्वयं ITR में दिखानी होती है।
नई और पुरानी कर व्यवस्था: किसमें ज्यादा फायदा
पुरानी कर व्यवस्था: धारा 24 की सभी कटौतियां (30% मानक + होम लोन ब्याज) मिलती हैं। यदि होम लोन है, तो किराए पर टैक्स बहुत कम हो जाता है।
नई कर व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट 2024 से): धारा 24(a) की 30% मानक कटौती और धारा 24(b) की होम लोन ब्याज कटौती — दोनों नहीं मिलतीं (सिवाय किराए पर दी गई संपत्ति पर, जहां ब्याज कटौती मिलती है)। यदि आपकी किराया आय अधिक है और होम लोन नहीं है, तो पुरानी व्यवस्था ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।
निर्णय सूत्र: यदि आपकी किराया आय पर धारा 24(b) के तहत बड़ी कटौती मिलती है, तो पुरानी व्यवस्था चुनें। दोनों में गणना करके तुलना करें।
पूंजीगत लाभ कर: बेचते समय क्या लगेगा
किराए पर दिए बाद संपत्ति बेचने पर:
- 24 महीने से कम धारण: STCG — टैक्स स्लैब के अनुसार
- 24 महीने से अधिक धारण: LTCG — 12.5% (बिना इंडेक्सेशन), या 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई संपत्ति पर ग्रैंडफादरिंग विकल्प से 20% with indexation
धारा 54 के तहत LTCG को नई आवासीय संपत्ति में पुनर्निवेश करके कर छूट मिल सकती है।
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