होम लोन पर इनकम टैक्स बेनिफिट — धारा 80C, 24B और Joint Loan (2026)
"₹50 लाख का होम लोन लेने पर सालाना ₹7 लाख तक की टैक्स कटौती मिल सकती है।"
यह सुनकर अच्छा लगता है — लेकिन इसके लिए सही टैक्स रिजीम चुनना, सही नाम पर संपत्ति रखना और सही तरीके से लोन लेना जरूरी है। गलती हुई तो यह फायदा शून्य हो जाता है।
पहले सबसे बड़ा सवाल: नई या पुरानी टैक्स रिजीम?
नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में होम लोन का कोई टैक्स फायदा नहीं है।
अगर आप नई कर व्यवस्था में हैं और संपत्ति आप खुद रहने के लिए (Self-Occupied) खरीद रहे हैं, तो धारा 80C और धारा 24B के तहत कोई कटौती नहीं मिलेगी।
पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में ये सभी फायदे उपलब्ध हैं।
इसलिए होम लोन लेने से पहले CA से यह जरूर पूछें: "मेरे लिए कौन सी रिजीम ज्यादा फायदेमंद है?"
आम नियम: अगर होम लोन का ब्याज + 80C डिडक्शन मिलाकर ₹3-4 लाख से ज्यादा बनता है, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद हो सकती है।
धारा 80C — मूलधन पुनर्भुगतान कटौती
अधिकतम कटौती: ₹1,50,000 प्रति वर्ष
आप होम लोन की जो EMI देते हैं, उसमें से मूलधन (Principal) का हिस्सा धारा 80C के तहत कटौती के योग्य है।
लेकिन ध्यान दें: 80C की ₹1.5 लाख की सीमा में PPF, LIC, ELSS, EPF सब शामिल हैं। अगर बाकी निवेश पहले ही ₹1.5 लाख की सीमा भर देते हैं, तो होम लोन का मूलधन अलग से फायदा नहीं देगा।
स्टाम्प ड्यूटी भी 80C में: जिस साल संपत्ति रजिस्ट्री हो, उस साल की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क भी 80C में दावा किया जा सकता है।
एक शर्त: यह कटौती तभी मिलती है जब घर का निर्माण पूरा हो जाए। Pre-construction period (यानी OC मिलने से पहले) के मूलधन भुगतान पर 80C नहीं मिलती।
धारा 24B — होम लोन ब्याज कटौती
Self-Occupied Property के लिए: अधिकतम ₹2,00,000 प्रति वर्ष
Let-Out Property के लिए: कोई ऊपरी सीमा नहीं — जितना ब्याज दिया, उतनी कटौती।
₹50 लाख का होम लोन, 8.5% ब्याज दर पर पहले साल का ब्याज लगभग ₹4.2 लाख होगा। लेकिन Self-Occupied Property के लिए आप सिर्फ ₹2 लाख ही क्लेम कर सकते हैं।
Pre-Construction Period का ब्याज: अगर आपने Under-Construction फ्लैट खरीदा है, तो निर्माण पूरा होने से पहले दिए गए ब्याज को "Pre-Construction Interest" कहते हैं। यह OC मिलने के बाद 5 बराबर किस्तों में 5 साल तक क्लेम किया जा सकता है।
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Joint Home Loan — Double Tax Benefit
यह वह strategy है जो पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हों, तो जरूर आजमाएं।
शर्त: दोनों को एक साथ:
- संपत्ति के Co-Owner (सह-मालिक) होना चाहिए
- होम लोन के Co-Borrower (सह-उधारकर्ता) होने चाहिए
- दोनों EMI में वास्तविक योगदान देते हों
अगर ये तीनों शर्तें पूरी हैं, तो दोनों अलग-अलग अपने ITR में कटौती क्लेम कर सकते हैं:
| कटौती का प्रकार | प्रति व्यक्ति | दोनों मिलाकर |
|---|---|---|
| धारा 80C (मूलधन) | ₹1,50,000 | ₹3,00,000 |
| धारा 24B (ब्याज) | ₹2,00,000 | ₹4,00,000 |
| कुल | ₹3,50,000 | ₹7,00,000 |
30% टैक्स ब्रैकेट में दोनों हों, तो सालाना टैक्स बचत: ₹7 लाख × 30% = ₹2.1 लाख।
पति-पत्नी Joint Property में टैक्स बचत कैसे करें
1. दोनों Co-Owner और Co-Borrower बनें: Sale Deed और Loan Agreement दोनों में दोनों के नाम।
2. EMI का अनुपात तय करें: अगर दोनों की आय अलग है, तो जिसकी ज्यादा आय हो उसकी EMI share ज्यादा रखें — ताकि वह ज्यादा ब्याज क्लेम कर सके।
3. स्टाम्प ड्यूटी में बचत: Joint Property में महिला को पहला मालिक (First Owner) बनाने से स्टाम्प ड्यूटी कम लगती है (महाराष्ट्र में 1%, दिल्ली में 2% की बचत)।
4. PMAY सब्सिडी: PMAY-U 2.0 के तहत EWS/LIG वर्ग में महिला का नाम अनिवार्य है — यह अलग से ₹1.80 लाख तक की सब्सिडी है।
धारा 80EEA — पहली बार खरीदने वालों के लिए (पुराने लोन)
यह कटौती उन लोगों के लिए है जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच होम लोन लिया था। नए लोन (2026) के लिए यह लागू नहीं होगी।
व्यावहारिक उदाहरण
परिदृश्य: पति की आय ₹15 लाख, पत्नी की ₹10 लाख। ₹60 लाख का फ्लैट Joint खरीदा। ₹50 लाख का Joint Home Loan लिया।
पहले साल ब्याज: लगभग ₹4.2 लाख
- पति: ₹2.1 लाख ब्याज क्लेम (2 लाख की सीमा, 2 लाख क्लेम)
- पत्नी: ₹2.1 लाख ब्याज क्लेम (2 लाख क्लेम)
- दोनों का 80C: ₹1.5-1.5 लाख
पुरानी रिजीम में कुल बचत: ₹7 लाख डिडक्शन पर लगभग ₹1.5-2 लाख टैक्स।
नई टैक्स रिजीम में क्या कोई होम लोन बेनिफिट नहीं?
पूरी तरह शून्य नहीं — एक अपवाद है।
नई टैक्स रिजीम में भी, अगर संपत्ति किराए पर दी गई (Let-Out) हो, तो धारा 24B के तहत ब्याज का दावा किया जा सकता है। लेकिन उस नुकसान को वेतन से Set-Off या अगले साल Carry Forward नहीं किया जा सकता।
Self-Occupied Property के लिए नई रिजीम में कोई होम लोन बेनिफिट नहीं।
व्यावहारिक सुझाव: जब तक होम लोन का ब्याज साल का ₹2+ लाख न हो और 80C में अन्य निवेश कम न हों — पुरानी रिजीम का फायदा कम होता है। CA से दोनों विकल्पों की गणना करवाएं।
धारा 80C में होम लोन का स्थान
80C की ₹1.5 लाख सीमा बहुत लोगों की EPF, LIC और PPF से पहले ही भर जाती है। ऐसे में होम लोन का मूलधन अतिरिक्त बेनिफिट नहीं देता।
80C के अंतर्गत क्या-क्या आता है:
- EPF/VPF Contribution
- PPF Deposit
- ELSS Mutual Fund
- NSC
- Life Insurance Premium
- Sukanya Samriddhi (बेटी के लिए)
- Home Loan Principal Repayment
- Stamp Duty + Registration (उसी वर्ष)
- Term Insurance Premium
अगर ये सब मिलाकर ₹1.5 लाख से ज्यादा हो जाएं, तो होम लोन का मूलधन अलग से 80C में Claim नहीं होगा।
इसीलिए धारा 24B (ब्याज कटौती) असली लाभ है — क्योंकि इसकी ₹2 लाख की सीमा 80C से अलग है।
होम लोन बेनिफिट कब से मिलते हैं?
Pre-Construction Period में (यानी OC/CC से पहले), मूलधन पर 80C नहीं मिलती। ब्याज पर तुरंत नहीं — बल्कि OC मिलने के बाद 5 साल में बराबर किस्तों में।
OC मिलने के बाद ही Tax Benefits शुरू होते हैं। यह एक कारण है क्यों Under-Construction खरीद में Tax Planning पहले से करनी चाहिए।
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