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म्यूटेशन, सेल अग्रीमेंट और सब रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री — पूरी प्रक्रिया

संपत्ति खरीद की प्रक्रिया में तीन कागजी कदम हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हैं लेकिन अलग-अलग समय पर होते हैं: सेल अग्रीमेंट, रजिस्ट्री और म्यूटेशन। बहुत से खरीदार रजिस्ट्री के बाद काम पूरा मान लेते हैं — और म्यूटेशन छूट जाता है। यह भविष्य में भारी समस्या बनता है।

सेल अग्रीमेंट क्या होता है?

सेल अग्रीमेंट (Agreement to Sell) वह प्रारंभिक अनुबंध है जो खरीदार और विक्रेता के बीच होता है। इसमें शर्तें तय होती हैं — लेकिन इससे मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता।

सेल अग्रीमेंट में ये बातें होनी चाहिए:

  • संपत्ति का पूरा विवरण (पता, सर्वे नंबर, Carpet Area)
  • कुल मूल्य और भुगतान का कार्यक्रम
  • कब्जे की तारीख
  • देरी पर जुर्माने की दर (प्रति महीना)
  • TDS की जिम्मेदारी किसकी
  • लोन लेने की शर्त (यदि लागू हो)

इस चरण में सामान्यतः बयाना राशि (Earnest Money / Token Amount) दी जाती है — कुल मूल्य का 10% से 20%।

महत्वपूर्ण: सेल अग्रीमेंट की स्टाम्पिंग, रजिस्ट्रेशन और नोटरी की जरूरत राज्य के नियमों के अनुसार जांचें। लागू स्टाम्पिंग या रजिस्ट्रेशन के बिना अग्रीमेंट कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।

बिक्री विलेख और बैनामा — दोनों एक ही हैं

"बिक्री विलेख" और "बैनामा" दोनों एक ही दस्तावेज के दो नाम हैं — Sale Deed। यह वह आधिकारिक अनुबंध है जिसे सब रजिस्ट्रार के सामने रजिस्टर किया जाता है और इसी से मालिकाना हक ट्रांसफर होता है।

सेल अग्रीमेंट और Sale Deed में फर्क:

पहलू सेल अग्रीमेंट Sale Deed (बैनामा)
मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता ट्रांसफर होता है
रजिस्ट्रेशन राज्य के नियम और परिस्थिति के अनुसार अनिवार्य है
कब होता है पहले बाद में (कब्जे से पहले या साथ)
स्टाम्प ड्यूटी कम या नहीं पूरी स्टाम्प ड्यूटी

सब रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री कैसे होती है

रजिस्ट्री वह कदम है जिससे आपका नाम सरकारी रिकॉर्ड में आता है।

रजिस्ट्री से पहले तैयार रखें:

  • Sale Deed का मसौदा (वकील से तैयार कराएं)
  • स्टाम्प ड्यूटी का ऑनलाइन भुगतान (GRAS या राज्य पोर्टल से)
  • पंजीकरण शुल्क (रजिस्ट्री फीस)
  • TDS Form 141 Challan (कुल विचार मूल्य ₹50 लाख या उससे अधिक होने पर)
  • खरीदार और विक्रेता दोनों के Aadhaar + PAN
  • दो गवाहों के Aadhaar और PAN

रजिस्ट्री के दिन क्या होता है:

  1. खरीदार, विक्रेता और दो गवाह सब रजिस्ट्रार ऑफिस (SRO) में उपस्थित हों
  2. Sale Deed पर सभी पक्षों के हस्ताक्षर
  3. बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (अंगूठे का निशान / आंखों का स्कैन)
  4. रजिस्ट्रार द्वारा दस्तावेज की जांच और स्टाम्प
  5. रजिस्ट्री नंबर और Receipt मिलती है

स्टाम्प ड्यूटी दरें (2026):

  • महाराष्ट्र: 6% (महिला खरीदार के लिए 5%)
  • दिल्ली: 6% (महिला के लिए 4%)
  • कर्नाटक: 5% + 2% पंजीकरण शुल्क
  • UP: 7% (महिला के लिए 6%)

पंजीकरण शुल्क: अधिकांश राज्यों में 1% (कर्नाटक में अब 2%)।

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म्यूटेशन कैसे करवाएं

म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) क्या है?

रजिस्ट्री के बाद सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटाकर नया मालिक का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया म्यूटेशन है। यह आयकर अधिनियम की किसी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं — यह स्थानीय नगर निगम / राजस्व विभाग का काम है।

म्यूटेशन क्यों जरूरी है:

  • संपत्ति कर आपके नाम पर आए
  • नगर निगम सेवाओं (पानी, बिजली) के लिए आवेदन आपके नाम पर हो
  • भविष्य में रीसेल करते समय खाता/पट्टा आपके नाम पर हो
  • स्थानीय रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज रहे (यह अकेले मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है)

म्यूटेशन के लिए आवेदन (ऑनलाइन):

अधिकांश राज्यों में अब यह ऑनलाइन होता है:

  • महाराष्ट्र: igrmaharashtra.gov.in या संबंधित नगर निगम/राजस्व प्राधिकरण का पोर्टल
  • दिल्ली: mcdonline.nic.in
  • कर्नाटक (BBMP): bbmpeaasthi.karnataka.gov.in
  • UP: upbhulekh.gov.in

दस्तावेज जो चाहिए:

  • Sale Deed की कॉपी
  • Encumbrance Certificate
  • संपत्ति कर रसीद
  • Aadhaar और PAN

शुल्क: संबंधित स्थानीय प्राधिकरण या पोर्टल की लागू शुल्क-सारणी के अनुसार।

समय सीमा: म्यूटेशन के लिए संबंधित स्थानीय नगर निगम या राजस्व प्राधिकरण की प्रक्रिया और समयसीमा लागू होती है।

ऑफलाइन म्यूटेशन प्रक्रिया

अगर ऑनलाइन सुविधा नहीं है:

  1. स्थानीय तहसीलदार कार्यालय या नगर पालिका जाएं
  2. म्यूटेशन आवेदन फॉर्म भरें
  3. Sale Deed, EC और संपत्ति कर की रसीद संलग्न करें
  4. शुल्क जमा करें और रसीद लें
  5. स्थानीय प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार म्यूटेशन सर्टिफिकेट लें

एक महत्वपूर्ण बात

म्यूटेशन न कराने पर तुरंत कोई कानूनी समस्या नहीं आती — इसीलिए बहुत लोग इसे टालते हैं। लेकिन जब आप 5-10 साल बाद संपत्ति बेचना चाहेंगे, तो नए खरीदार और उनका बैंक म्यूटेशन सर्टिफिकेट मांगेगा। तब दौड़भाग होगी।

रजिस्ट्री के तुरंत बाद म्यूटेशन करवा लें।

पूरी प्रक्रिया का सही क्रम

अनेक खरीदार अलग-अलग कदमों को सही क्रम में नहीं करते — जिससे देरी और समस्याएं होती हैं। यहां पूरी प्रक्रिया का सही क्रम है:

  1. बुकिंग से पहले: RERA चेक, EC देखें, Title Deed जांचें
  2. सेल अग्रीमेंट: Carpet Area, Possession Date, Penalty Clause
  3. होम लोन आवेदन: KYC, Income Proof, Property Documents
  4. TDS जमा करना: कुल विचार मूल्य ₹50L+ होने पर, हर भुगतान पर Form 141
  5. स्टाम्प ड्यूटी भुगतान: ऑनलाइन GRAS/IGRS पर
  6. रजिस्ट्री: SRO में खरीदार + विक्रेता + 2 गवाह
  7. OC लेना: Final Payment से पहले
  8. म्यूटेशन: स्थानीय नगर निगम या राजस्व प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार
  9. Khata/Patta Transfer: संबंधित नगर निगम या राजस्व प्राधिकरण की स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार
  10. Property Tax Registration: नए मालिक के रूप में

स्टाम्प ड्यूटी पर स्त्री खरीदार को फायदा

अगर संपत्ति महिला के नाम पर या Joint (महिला First Owner) रजिस्टर हो, तो कई राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी कम लगती है:

  • महाराष्ट्र: महिला खरीदार को 1% कम (5% vs पुरुष 6%)
  • दिल्ली: महिला खरीदार को 2% कम (4% vs पुरुष 6%)
  • UP: महिला खरीदार को 1% कम (6% vs पुरुष 7%)

₹60 लाख की संपत्ति पर दिल्ली में यह बचत ₹1.2 लाख है। PMAY में घर परिवार की महिला मुखिया के नाम पर या पति के साथ संयुक्त नाम पर होना चाहिए; परिवार में कोई वयस्क महिला न हो तो अपवाद है। इन दो कारणों से Joint Ownership (पत्नी को First Owner रखें) हमेशा समझदारी है।

पहले घर की खरीद में हर कदम को सही क्रम में समझने के लिए — सेल अग्रीमेंट से म्यूटेशन तक — हमारी पहला घर खरीदने की पूरी गाइड आपके लिए तैयार है।

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