$0 India — Quick-Start Checklist

प्रॉपर्टी खरीदते समय कौन से डॉक्यूमेंट चेक करें — पूरी चेकलिस्ट

"बिल्डर विश्वसनीय लग रहा था। लेकिन बाद में पता चला कि संपत्ति पर बैंक का लोन पहले से था।"

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है — यह वास्तविकता है जो हर साल सैकड़ों खरीदारों के साथ होती है। और इससे बचने का एकमात्र तरीका है — पैसे देने से पहले कागजात खुद जांचना।

यहां वह पूरी चेकलिस्ट है जो हर भारतीय घर खरीदार को पता होनी चाहिए।

1. मूल विलेख (Title Deed / Mother Deed) — सबसे पहले यही देखें

मूल विलेख यह साबित करता है कि विक्रेता ही संपत्ति का वास्तविक मालिक है। इसमें पिछले 20-30 सालों की मालिकाना हक की श्रृंखला होती है।

क्या चेक करें:

  • विक्रेता का नाम टाइटल में सही है या नहीं
  • पिछले सभी मालिकों से विक्रेता तक की श्रृंखला टूटी तो नहीं
  • कोई विवादित उत्तराधिकार (Disputed Succession) तो नहीं

खतरा: अगर श्रृंखला में कहीं कमी है, तो भविष्य में पुराने मालिक के वारिस दावा ठोक सकते हैं — और आप का पूरा निवेश फंस सकता है।

यह कब देखें: बुकिंग राशि या टोकन मनी देने से पहले।

2. भार प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate — EC) — सबसे जरूरी दस्तावेज

भार प्रमाण पत्र (EC) क्या होता है?

यह एक सरकारी दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि संपत्ति पर कोई बंधक (Mortgage), लोन, कोर्ट का आदेश या सरकारी देनदारी नहीं है। सरल शब्दों में: संपत्ति "साफ" है।

Encumbrance Certificate कैसे निकालें (ऑनलाइन और ऑफलाइन):

ऑनलाइन (राज्यवार):

  • कर्नाटक: kaveri.karnataka.gov.in
  • तमिलनाडु: tnreginet.gov.in
  • आंध्र प्रदेश: registration.ap.gov.in
  • तेलंगाना: registration.telangana.gov.in
  • महाराष्ट्र: igrmaharashtra.gov.in

ऑफलाइन: अपने जिले के उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-Registrar Office — SRO) से Form 15 के लिए आवेदन करें।

EC का फॉर्म:

  • SRO से कम से कम 30 वर्षों का Form 15 EC लें।
  • किसी राज्य या पोर्टल पर Nil EC के लिए अलग प्रारूप लागू हो तो उसी स्थानीय प्रक्रिया का पालन करें।

कितने साल का EC लें?

बहुत लोग सिर्फ 10-12 साल का EC लेते हैं — यह गलती है। न्यूनतम 30 साल का EC लेना अनिवार्य है। पुराने बंधक भी 30 साल के भीतर प्रभावी रह सकते हैं।

यह कब देखें: लोन आवेदन और बिक्री समझौते से पहले।

3. अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate — OC)

OC यह प्रमाणित करता है कि इमारत नगर निगम की स्वीकृत योजना के अनुसार बनी है और रहने के योग्य है।

OC न होने के परिणाम:

  • बिजली और पानी कनेक्शन काटे जा सकते हैं
  • भवन की कानूनी और व्यावहारिक स्थिति में जोखिम पैदा हो सकता है
  • निर्माण-चरण की बिक्री पर लागू 5% या पात्र किफायती आवास में 1% GST लगता है; सक्षम प्राधिकारी का CC या OC मिलने पर ready-to-move छूट में GST 0% हो सकता है
  • भविष्य में रीसेल करना मुश्किल होगा

यह कब देखें: अंतिम भुगतान और रजिस्ट्री से पहले।

मुफ़्त डाउनलोड

India — Quick-Start Checklist पाएँ

इस पूरे लेख की प्रिंट करने योग्य चेकलिस्ट — साथ में एक्शन प्लान और संदर्भ गाइड, जिन्हें आप आज से ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

4. Commencement Certificate (CC)

CC यह साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन ने निर्माण शुरू करने की अनुमति दी है। OC और CC अलग-अलग दस्तावेज हैं।

  • CC = निर्माण शुरू करने की अनुमति (निर्माण के पहले)
  • OC = निर्माण पूरा होने के बाद रहने की अनुमति

बिना CC के निर्माण स्थानीय स्वीकृति और अनुपालन जोखिम पैदा कर सकता है; लागू नियमों की जांच करें।

5. RERA रजिस्ट्रेशन (नए प्रोजेक्ट के लिए)

अगर आप नई संपत्ति खरीद रहे हैं (नया निर्माण) और परियोजना लागू RERA सीमा में आती है, तो RERA पंजीकरण संख्या जांचें। राज्य RERA पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट की स्थिति, QPR रिपोर्ट और शिकायत इतिहास देखें।

6. खाता / पट्टा प्रमाणपत्र (Khata / Patta)

खाता (कर्नाटक में) नगर निगम का रिकॉर्ड है, जबकि पट्टा (तमिलनाडु, आंध्र में) राजस्व रिकॉर्ड है; दोनों संपत्ति को मालिक के नाम से जोड़ने में उपयोगी होते हैं।

  • A Khata (बेंगलुरु): कानूनी संपत्ति रिकॉर्ड; सभी अनुमोदन अलग से जांचें
  • B Khata: केवल कर/गैर-अनुपालन का रिकॉर्ड — इस पर लोन, अनुपालन और रीसेल का जोखिम रहता है

खाते के बिना संपत्ति कर और रीसेल की प्रक्रिया बहुत कठिन हो सकती है और रिकॉर्ड/अनुपालन जोखिम रहता है।

7. Approved Plan (स्वीकृत नक्शा)

बिल्डर के ब्रोशर में दिखाया गया नक्शा और नगर निगम का स्वीकृत नक्शा एक जैसा होना चाहिए। फर्क हो तो अनुपालन और कानूनी जोखिम की जांच करें।

8. Sale Agreement (बिक्री समझौता)

यह लेनदेन का मुख्य अनुबंध है। इसमें ये चीजें स्पष्ट होनी चाहिए:

  • कुल मूल्य और भुगतान कार्यक्रम
  • कब्जे की निश्चित तारीख
  • देरी पर जुर्माने की दर
  • Carpet Area (Super Built-Up नहीं)

9. No Dues Certificate (बकाया नहीं प्रमाणपत्र)

रिसेल प्रॉपर्टी के मामले में विक्रेता से यह प्रमाणपत्र लें कि संपत्ति पर:

  • कोई बकाया संपत्ति कर नहीं है
  • सोसायटी का कोई बकाया नहीं है
  • बिजली/पानी का कोई बकाया नहीं है

10. 7/12 उतारा (महाराष्ट्र के लिए) / खसरा-खतौनी (उत्तर प्रदेश के लिए)

यह भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज हैं जो कृषि भूमि की स्थिति, मालिकाना हक और किसी भी सरकारी दावे को दर्शाते हैं। जमीन पर बन रहे प्रोजेक्ट के लिए इसे जांचें।

Title Deed Verification — क्या वकील जरूरी है?

हां। EC और Title Deed की जांच एक योग्य प्रॉपर्टी वकील से करवाना सबसे सुरक्षित है। वकील की फीस (₹10,000 से ₹25,000 तक) संपत्ति के मूल्य की तुलना में बहुत कम है।

लेकिन वकील से पहले खुद भी EC ऑनलाइन निकालकर देखें। EC में कोई एंट्री है तो उस पर तत्काल सवाल पूछें।

विभिन्न राज्यों के राजस्व रिकॉर्ड

संपत्ति जांच में राज्य-विशिष्ट दस्तावेज भी आते हैं:

महाराष्ट्र — 7/12 उतारा (Satbara Utara): कृषि भूमि का स्वामित्व रिकॉर्ड। किसी जमीन पर अपार्टमेंट बन रहा है — उस जमीन का 7/12 देखें। इसमें भूमि का मालिक, Gat Number, और कोई बैंक लोन दर्ज होता है।

ऑनलाइन: MahaBhulekh (bhulekh.mahabhumi.gov.in)

उत्तर प्रदेश — खसरा-खतौनी: खसरा भूमि के पार्सल की पहचान करता है। खतौनी उस भूमि के मालिकों की सूची है। UP में यह upbhulekh.gov.in पर मिलता है।

कर्नाटक — RTC (Rights, Tenancy & Crops): भूमि स्वामित्व, किरायेदारी और फसल का रिकॉर्ड। bhoomi.karnataka.gov.in पर उपलब्ध।

हरियाणा/पंजाब — Jamabandi: भूमि स्वामित्व का मुख्य रिकॉर्ड। jamabandi.punjab.gov.in

जब वकील जरूरी नहीं — और जब है

बिना वकील के कर सकते हैं:

  • EC ऑनलाइन निकालना और देखना
  • RERA Portal पर Project Status Check
  • Property Tax बकाया जांचना
  • Society NOC Status पूछना

वकील लेना विशेष रूप से उचित है:

  • Title Deed की Chain of Title Analysis (30 साल)
  • Sale Deed का Draft तैयार करना
  • किसी भी Court Order या Litigation का मूल्यांकन
  • Power of Attorney आधारित बिक्री की जांच
  • NRI से खरीद में TDS और FEMA Compliance

₹60 लाख की संपत्ति पर ₹20,000 वकील की फीस — यह लगभग 0.33% है। सस्ती सुरक्षा।

Self-Verification vs Professional Verification

दस्तावेज खुद कर सकते हैं? Professional की मदद?
EC Online Check हां वकील से 30-साल Review
RERA Portal हां नहीं
Property Tax हां नहीं
Title Chain Analysis नहीं हां
Sale Deed Draft नहीं हां
Litigation History आंशिक हां

पहले घर की खरीद में कागजात की जांच से लेकर रजिस्ट्री तक की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह समझने के लिए हमारी पहला घर खरीदने की पूरी गाइड देखें।

India — Quick-Start Checklist मुफ़्त पाएँ

India — Quick-Start Checklist डाउनलोड करें — चेकलिस्ट, टेम्पलेट और एक्शन प्लान वाली प्रिंट करने योग्य गाइड, जिसे आप आज से ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

और जानें →