रिसेल फ्लैट खरीदते समय क्या ध्यान रखें — 10 जरूरी बातें
रिसेल फ्लैट के फायदे साफ हैं: तत्काल कब्जा, जानी-मानी सोसायटी, स्थापित बुनियादी ढांचा। लेकिन नए फ्लैट की तुलना में रिसेल में कागजी जांच ज्यादा जरूरी है — क्योंकि एक पुराना अनसुलझा विवाद आपके नाम पर आ सकता है।
1. Title Chain (स्वामित्व की श्रृंखला) जांचें
रिसेल में पिछले सभी मालिकों से लेकर वर्तमान विक्रेता तक का मालिकाना हक साफ होना चाहिए। अगर Chain में कोई अनुबंध टूटा है, विरासत का विवाद है, या कोई अदालती आदेश है — तो आपके नाम पर आते ही वह विवाद भी आपका हो जाता है।
क्या करें: वकील से पिछले 30 साल की Title Search कराएं।
2. Encumbrance Certificate (EC) लें
EC (भार प्रमाण पत्र) से पता चलता है कि संपत्ति पर कोई पुराना लोन, बंधक या कोर्ट का आदेश है या नहीं।
कितने साल का EC: न्यूनतम 30 साल।
निल EC (Form 16) सबसे अच्छा है। अगर EC में कोई Entry है (जैसे पुराना होम लोन), तो विक्रेता से Loan Closure Letter और NOC from Bank लें।
3. Pending Dues की जांच
रिसेल में विक्रेता के बकाया शुल्क आपके नाम पर आ सकते हैं। ये जांचें:
- Society का बकाया Maintenance
- संपत्ति कर (Property Tax) बकाया
- बिजली/पानी का बकाया
- किसी भी Special Levy का बकाया
विक्रेता से No Dues Certificate जरूर लें।
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4. Society NOC (No Objection Certificate)
रिसेल में Society का NOC जरूरी होता है। Society यह NOC तभी देती है जब विक्रेता का सारा बकाया चुका हुआ हो।
NOC के बिना:
- नए मालिक का नाम Society के रजिस्टर में नहीं आएगा
- Maintenance Bill नए मालिक को नहीं आएगा
- Society की Amenities का उपयोग करना मुश्किल होगा
5. Original Sale Deed देखें
विक्रेता के पास Original Sale Deed होनी चाहिए — जो उन्होंने पहले खरीदते वक्त रजिस्टर कराई थी। अगर Original Deed नहीं है (जैसे बैंक के पास Mortgage है), तो विक्रेता को बैंक से Deed निकलवानी होगी।
बिना Original Deed के खरीदारी न करें।
6. Occupancy Certificate (OC) और Completion Certificate (CC)
नए फ्लैट की तरह रिसेल में भी OC और CC जरूरी हैं। अगर OC नहीं है, तो:
- बिजली/पानी कनेक्शन की समस्या हो सकती है
- Bank पुराना Loan clear होने पर नया Loan देने से हिचकिचा सकता है
- रीसेल करते वक्त अगला खरीदार OC मांगेगा
7. Physical Inspection करें
रिसेल फ्लैट में निर्माण की उम्र देखें। जांचें:
- दीवारों में दरारें, सीलन (Seepage)
- छत की स्थिति
- प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल की स्थिति
- खिड़की और दरवाजे ठीक से बंद होते हैं?
- पार्किंग और Storage का Allotment Letter
एक अनुभवी Civil Engineer से Structural Inspection कराना (₹3,000-8,000) बड़ी बचत है।
8. Loan-to-Value और Bank Valuation
रिसेल फ्लैट पर बैंक का Loan, Market Value का 80-90% नहीं बल्कि बैंक की Internal Valuation (Registered Valuer से) के आधार पर होगा।
अगर Market Price ₹60 लाख है लेकिन बैंक का Valuer ₹50 लाख Valuation देता है, तो Loan ₹40-45 लाख (80% of ₹50L) मिलेगा — बाकी आपको जेब से देना होगा।
Loan confirm होने से पहले बैंक की Valuation Report जरूर देख लें।
9. Power of Attorney (POA) वाले मामलों में सावधानी
अगर विक्रेता POA (Power of Attorney) के आधार पर बेच रहा है, तो:
- POA Valid और Registered है?
- POA देने वाला व्यक्ति जीवित है?
- POA में Sale का अधिकार स्पष्ट रूप से दिया गया है?
सुप्रीम कोर्ट के 2011 के फैसले (Suraj Lamp vs State of Haryana) के अनुसार, POA के आधार पर की गई बिक्री Valid नहीं होती — केवल Registered Sale Deed ही मान्य है। अगर विक्रेता कहे कि POA से रजिस्ट्री होगी — तो यह गलत है।
10. Capital Gains Tax की जानकारी लें
रिसेल बेचने वाले को Capital Gains Tax देनी पड़ सकती है। अगर विक्रेता इसे छुपाने के लिए बिक्री मूल्य कम दिखाना चाहता है (जैसे ₹60 लाख की जगह ₹40 लाख रजिस्टर करना), तो यह आपके लिए भी समस्या है।
धारा 56(2)(x) के तहत, Circle Rate और Actual Sale Price का अंतर खरीदार की "अन्य आय" माना जाएगा — और उस पर Tax लगेगा।
हमेशा Circle Rate या उससे ऊपर की कीमत पर रजिस्ट्री कराएं।
रिसेल vs New Project — कब कौन सा बेहतर?
रिसेल बेहतर होता है जब:
- तत्काल कब्जा चाहिए
- स्थापित इलाके और बुनियादी ढांचे की जरूरत है
- Under-Construction जोखिम नहीं उठाना
- GST बचाना है (Resale = 0% GST)
- बड़े बिल्डर का पुराना ब्रांडेड प्रोजेक्ट है
New Project बेहतर होता है जब:
- कम कीमत पर ज्यादा जगह चाहिए (Under-Construction 10-15% सस्ता)
- PMAY सब्सिडी का लाभ उठाना है (केवल नई संपत्ति पर)
- Customization की जरूरत है
- आप 3-4 साल तक कब्जे का इंतजार कर सकते हैं
रिसेल में EMI और Tax Planning
रिसेल फ्लैट में कोई GST नहीं। लेकिन स्टाम्प ड्यूटी और TDS वही लागू होती है।
Capital Gains Tax (विक्रेता के लिए) का प्रभाव आप पर:
अगर विक्रेता को Capital Gains Tax बचानी है और वे कीमत कम दिखाना चाहते हैं, तो आयकर विभाग आप पर धारा 56(2)(x) लागू कर सकता है। इससे बचने के लिए:
- Circle Rate या उससे ऊपर की कीमत पर रजिस्ट्री करें
- विक्रेता की Tax Planning आपकी समस्या नहीं — अपना ITR साफ रखें
रिसेल में Loan कैसे मिलता है?
New Project के मुकाबले Resale में Loan Approval थोड़ा ज्यादा जांच मांगता है:
- बैंक का Valuer संपत्ति का निरीक्षण करेगा
- Legal Team EC और Title Deed जांचेगी
- अगर संपत्ति पर पुराना Loan है, तो पहले Foreclosure/NOC चाहिए
- Older Buildings पर बैंक कम LTV दे सकता है
SBI और HDFC जैसे बड़े बैंकों के पास Pre-approved Project नहीं होती Resale के लिए — लेकिन ये बैंक Resale पर Loan देते हैं, बस Processing Time ज्यादा लगता है।
एक व्यावहारिक चेकलिस्ट
Resale Flat पर Offer देने से पहले यह 5 काम करें:
- ऑनलाइन EC निकालें (10 मिनट, मुफ्त)
- RERA Portal पर बिल्डर/Society का नाम खोजें
- Property Tax Receipt की Photo मांगें (बकाया तो नहीं?)
- Society Secretary से NOC Process की जानकारी लें
- Bank Loan के लिए अनौपचारिक Valuation करें — Market Price और Bank Valuation में अंतर हो सकता है
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