संपत्ति खरीद पर GST: अंडर-कंस्ट्रक्शन बनाम रेडी-टू-मूव — पूरी जानकारी
घर खरीदने के सपने में एक चीज़ अक्सर बजट बिगाड़ देती है — GST। बिल्डर का ब्रोशर ₹60 लाख दिखाता है, लेकिन असल में आपको ₹63 लाख या उससे ज़्यादा चुकाने पड़ते हैं। और सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोग सोचते हैं GST हर संपत्ति पर लगता है — जो सच नहीं है।
यह लेख आपको बताएगा कि GST कब लगता है, कब नहीं, और कितना लगता है — ताकि आप घर खरीदने से पहले सही बजट बना सकें।
GST का मूल नियम: पूर्णता प्रमाणपत्र (CC/OC) ही तय करता है सब कुछ
भारत में GST का नियम बहुत सरल है — जिस संपत्ति का पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) या अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) मिल चुका है, उस पर GST शून्य है।
यानी:
- रेडी-टू-मूव (RTM) फ्लैट जिस पर सक्षम प्राधिकारी से OC/CC मिल चुकी है → GST शून्य
- अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट जिस पर अभी निर्माण जारी है → GST लागू
यह फर्क आपके लाखों रुपए बचा या खर्च करा सकता है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन संपत्तियों पर GST की दरें (2026)
अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. सामान्य आवासीय फ्लैट — 5% GST (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना)
जो संपत्तियां किफायती आवास की परिभाषा में नहीं आतीं, उन पर 5% GST लागू होता है। महत्वपूर्ण बात — यह 5% कार्पेट एरिया के आधार पर गणना की गई संपत्ति के मूल्य पर लगता है।
उदाहरण: ₹80 लाख का अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट
- GST: ₹80 लाख × 5% = ₹4 लाख अतिरिक्त
- कुल देय: ₹84 लाख
2. किफायती आवास — 1% GST
यदि संपत्ति "किफायती आवास" की परिभाषा में आती है, तो GST केवल 1% है। किफायती आवास की शर्तें:
| श्रेणी | मेट्रो शहर | गैर-मेट्रो शहर |
|---|---|---|
| अधिकतम कार्पेट एरिया | 60 वर्ग मीटर | 90 वर्ग मीटर |
| अधिकतम संपत्ति मूल्य | ₹45 लाख | ₹45 लाख |
मेट्रो शहरों में मुंबई, दिल्ली-NCR, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।
उदाहरण: मुंबई में 55 वर्ग मीटर कार्पेट का ₹42 लाख का फ्लैट
- दोनों शर्तें पूरी → 1% GST
- GST: ₹42,000 मात्र
- बनाम सामान्य श्रेणी में: ₹2,10,000 (5%)
- बचत: ₹1,68,000
रेडी-टू-मूव पर GST — क्या पूरी तरह शून्य है?
RTM संपत्ति पर GST शून्य है — लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त के साथ।
बिल्डर के पास सक्षम प्राधिकारी (नगर निगम/नगर पालिका/विकास प्राधिकरण) से जारी OC/CC होनी चाहिए। अगर बिल्डर ने इमारत पूरी कर ली है लेकिन OC नहीं ली, तो:
- तकनीकी रूप से वह संपत्ति अभी भी "अंडर-कंस्ट्रक्शन" मानी जाएगी
- GST लागू होगा
- नगर पालिका बिजली-पानी कनेक्शन देने से मना कर सकती है
- ऐसे फ्लैट में रहना कानूनी रूप से जोखिम भरा है
व्यावहारिक सलाह: बिल्डर से OC की कॉपी मांगें — और इसे राज्य RERA पोर्टल पर भी सत्यापित करें।
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GST की गणना: सुपर बिल्ट-अप बनाम कार्पेट एरिया का जाल
बिल्डर अक्सर सुपर बिल्ट-अप एरिया पर कीमत बताते हैं, जो वास्तविक रहने योग्य कार्पेट एरिया से 25-30% अधिक होता है।
लेकिन GST की गणना GST काउंसिल के नियमों के तहत उस मूल्य पर होती है जो बिक्री समझौते (Sale Agreement) में दर्शाया गया है — न केवल बेस मूल्य पर, बल्कि निम्नलिखित सभी पर:
- बेस मूल्य (Base Price)
- कार पार्किंग शुल्क (यदि बिल्डर अलग से चार्ज करता है)
- क्लब मेंबरशिप शुल्क
- फ्लोर राइज चार्ज
- प्रीफरेंशियल लोकेशन चार्ज (PLC)
नोट: स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क GST के दायरे में नहीं आते।
किस चीज़ पर GST नहीं लगता?
| लेनदेन | GST |
|---|---|
| OC प्राप्त RTM फ्लैट की खरीद | शून्य |
| भूखंड (Plot) की खरीद | शून्य |
| द्वितीयक बाजार (रिसेल) में पुरानी संपत्ति | शून्य |
| किफायती अंडर-कंस्ट्रक्शन (60/90 sqm, ≤₹45L) | 1% |
| सामान्य अंडर-कंस्ट्रक्शन | 5% |
व्यावहारिक उदाहरण: GST बनाम रेडी-टू-मूव का वित्तीय तुलनात्मक विश्लेषण
परिदृश्य: बेंगलुरु में 2 BHK फ्लैट — दो विकल्प
| विवरण | विकल्प A: अंडर-कंस्ट्रक्शन | विकल्प B: RTM (OC सहित) |
|---|---|---|
| बेस मूल्य | ₹70,00,000 | ₹78,00,000 |
| GST (5%) | ₹3,50,000 | शून्य |
| स्टाम्प ड्यूटी (5%) | ₹3,50,000 | ₹3,90,000 |
| पंजीकरण शुल्क (2%) | ₹1,40,000 | ₹1,56,000 |
| कुल अधिग्रहण लागत | ₹78,40,000 | ₹83,46,000 |
अंडर-कंस्ट्रक्शन सस्ता दिखता है — लेकिन इसमें निर्माण जोखिम, देरी का जोखिम, और 2-3 साल तक किराया + EMI दोनों चुकाने का दबाव है।
GST में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) — खरीदार को कोई फायदा नहीं
1 अप्रैल 2019 के बाद की नई योजना के अंतर्गत बिल्डर को ITC लेने की अनुमति नहीं है और इसी कारण दरें घटाकर 5% और 1% कर दी गई थीं। इसका मतलब है कि बिल्डर ने सीमेंट, स्टील पर जो GST चुकाया वो उसे वापस नहीं मिलता — और इसीलिए उसकी लागत कुछ बढ़ जाती है, जो अंततः मूल कीमत में परिलक्षित होती है।
1 अप्रैल 2019 से पहले बुक की गई परियोजनाएं: कुछ पुरानी परियोजनाओं पर पुरानी दरें (8%/12%) लागू थीं। यदि आप कोई ऐसी पुरानी परियोजना खरीद रहे हैं, तो बिल्डर से पूछें कि वह किस दर पर GST चार्ज कर रहा है।
सबसे आम गलतियां जो खरीदार करते हैं
गलती 1: RTM मानकर फ्लैट बुक करना लेकिन OC जांचना भूल जाना → परिणाम: GST देनदारी + कानूनी जोखिम
गलती 2: किफायती आवास मानकर 1% GST की उम्मीद करना, जबकि कार्पेट एरिया 63 sqm है → परिणाम: 5% GST लगता है, बजट 4% बढ़ जाता है
गलती 3: GST और स्टाम्प ड्यूटी को एक ही खाते में जोड़ना → दोनों अलग-अलग हैं, अलग समय पर, अलग-अलग सरकारों को
गलती 4: बिल्डर से GST रसीद न मांगना → GST रसीद (Tax Invoice) लेना अनिवार्य है — यह आपका कर अनुपालन का सबूत है
GST और TDS — क्या दोनों एक साथ लागू होते हैं?
हां। यदि संपत्ति का मूल्य ₹50 लाख से अधिक है और वह अंडर-कंस्ट्रक्शन है:
- GST (5% या 1%) बिल्डर को देते हैं
- TDS (1%, धारा 393/पुरानी 194-IA) विक्रेता/बिल्डर को देय भुगतान से काटते हैं
दोनों अलग-अलग दायित्व हैं और दोनों की अनुपालना अनिवार्य है।
संक्षिप्त चेकलिस्ट: GST संबंधी
- [ ] क्या OC/CC मिल चुकी है? (हां → GST शून्य)
- [ ] अगर अंडर-कंस्ट्रक्शन है, तो कार्पेट एरिया 60/90 sqm से कम है?
- [ ] संपत्ति मूल्य ₹45 लाख से कम है? (दोनों हां → 1% GST)
- [ ] बिल्डर से GSTIN नंबर वाली Tax Invoice ली है?
- [ ] Sale Agreement में सभी अतिरिक्त शुल्क (पार्किंग, PLC) दर्ज हैं?
GST सिर्फ एक कर की बात नहीं है — यह आपके घर खरीदने के पूरे वित्तीय गणित को प्रभावित करता है। स्टाम्प ड्यूटी, TDS, PMAY पात्रता, होम लोन EMI गणना — ये सब मिलकर आपकी असल लागत बनाते हैं।
अगर आप इन सभी पहलुओं को एक जगह, हिंदी में, चरण-दर-चरण समझना चाहते हैं, तो हमारी पहला घर खरीदने की पूरी गाइड आपके लिए ही बनाई गई है — PMAY से रजिस्ट्री तक, हर कदम पर।
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